जब समोसे खिलाकर नेता जी ने, प्रधानजी की ऐसी-तैसी फेर दी!

व्यंग्य: कानों देखी 
 
 पार्टी प्रधान जी ने एक दिन अचानक ही संवाददाता सम्मेलन बुला लिया। पत्रकार वार्ता में पत्रकारों को चाय-पानी कराना था। सो प्रधान जी ने पॉकेट में हाथ डाला तो कुछ पैसे थे। जिनको प्रधान जी खरचने के मूड में नहीं थे। फिर प्रधान जी ने एक तरकीब निकाली कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे, यानी काम भी हो जाए और पैसे भी खर्च न हो। इसी तरकीब के तहत एक दो नेताओं के साथ प्रधान जी प्रेस कांफ्रेंस करने लगे। लेकिन प्रधान जी का ध्यान तो पत्रकारों के चाय-पानी पर भी था। तभी पत्रकारों के साथ जवाब सवाल करते प्रधान जी ने अपनी व्यस्तता दिखाते हुए बगल में बैठे एक जिला स्तरीय नेता के कान में कुछ बुदबुदाया। इसके साथ न चाहते हुए भी जिला स्तरीय नेता अपनी सीट से उठकर बाजार से चाय-पानी की व्यवस्था करने निकल पड़े। 
 
जिला स्तरीय नेताजी अभी बाजार पहुंचे भी नहीं थे कि प्रधान जी के बगल में बैठे एक अन्य नेता फोन पर फोन करने लगे कि इतनी देरी हो गई और तुम चाय-पानी लेकर कार्यालय नहीं पहुंचे हो। जिला स्तरीय नेताजी बार बार समझाते रहे कि अभी तो वह बाजार पहुंचे ही नहीं, तो चाय-पानी कैसे ले लाऊं। पर प्रधान जी के बगल में नेता थे कि मान हीं नहीं रहे थे। खैर जैसे तैसे जिला स्तरीय नेताजी चाय-पानी के साथ समोसे लेकर पार्टी कार्यालय पहुंच गए। 
 
प्रेस वार्ता कर रहे प्रधान जी जिला स्तरीय नेता जी के हाथ में चाय-पानी के साथ समोसे देख गदगद हो गए। गदगद हो भी क्यों नहीं, क्योंकि प्रधान जी की तरकीब सफल रही। प्रधान जी के बगल में बैठकर फोन पर फोन करने वाले नेता भी काफी खुश थे, क्योंकि उन्हें भी अपनी पॉकेट ढिली नहीं करनी पड़ी थी। खैर, जैसे ही चाय-पानी के साथ समोसे लेकर जिला स्तरीय नेता जी आए वैसे ही प्रेस कांफ्रेंस खत्म हो गई। खैर जो भी हो पत्रकारों के साथ मौके पर मौजूद अन्य नेताओं ने भी समोसे तोड़े, फूंक-फूंककर चाय पी। पर अंदर ही अंदर जिला स्तरीय नेताजी जबरदस्त गुस्से में थे। पार्टी कार्यालय में नेताजी ने प्रधान जी समक्ष गुस्से का इजहार तो किया पर इसमें वह जोश नहीं था। पर मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। 
 
देर शाम होते ही जब जिला स्तर के इस नेता जी ने लाल पानी का सेवन किया तो उनमें गुस्सा और जोश दोनों ही एक साथ आए। फिर किया था मोबाइल फोन पर प्रधान जी की ऐसी तैसी फेरने को सुनने वाले भी हैरान और स्तब्ध थे। इसके बाद प्रधान जी के बगल में फोटो खिंचवाने वाले नेताओं को वो सारी बातें कही, जिसे लिखा नहीं जा सकता है। कुछ लोग बाद में बीच-बचाव में आया। जिला स्तर के नेताजी का आक्रामक रूख को देखते हुए प्रधान जी खुद मनाने उनके घर पहुंचे। उन्हें मनाया गया। फिलहाल नेताजी शांत बताए जाते हैं। कुछ नेता तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि इस पूरे प्रकरण की रिकार्डिंग कुछ लोगों के पास अभी मौजूद है। ऐसे भिड़े समोसे पर नेता जी। 
 
22 8 2016