पंजाब में सुगम टेलीकॉम कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए कार्यबल की चुनौतियां

चंडीगढ़, 16 मई 2017 : टेलीकम्युनिकेशंस सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार है, जो देश में हर रोज कई बार 1$17 बिलियन से अधिक उपभोक्ताओं को सेवाएं प्रदान करता है। दुनिया के दूसरे सबसे बड़े बाजार के रूप में भारत की मोबाईल अर्थव्यवस्था भारत के सकल घरेलू उत्पाद  जीडीपी) में बहुत बड़ा योगदान देती है। इस उद्योग की तीव्र वृद्घि का आंकलन इस बात से भी किया जा सकता है कि रैंडस्टैड इंडिया की एक शोध के अनुसार, टेलीकॉम उद्योग अगले पांच सालों में 40 लाख प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष नौकरियों का निर्माण करने वाला है।

अकेले पंजाब क्षेत्र में, लगभग 15,000 मोबाईल टॉवर साईट्स 35 मिलियन टेलीकॉम ऑपरेटर्स को सेवाएं प्रदान कर रही हैं तथा इनसे टेलीकॉम उद्योग से 20,000 से ज्यादा लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार पाते हैं। इन टॉवर साईट्स के लगातार कार्य संचालन के लिए बिजली आपूर्ति का काम सरकार करती है, जिससे क्षेत्र में सुगम कनेक्टिविटी मिलती है। पंजाब देश के उन राज्यों में से एक है, जहां पर बिजली की क्वालिटी काफी अच्छी तथा स्थिर है। सरकार की ओर से यह निरंतर सहयोग टेलीकॉम ऑपरेशंस की सफलता में एक मजबूत स्तंभ है।

टेलीकॉम उद्योग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, टेलीकॉम टॉवर, जिन्हें पैसिव इन्नस्ट्रक्चर उद्योग भी कहा जाता है, ये क्षेत्र के विभिन्न ऑपरेटर्स को टेलीकॉम सेवाएं प्रदान करने के लिए एक स्तंभ के रूप में काम करते हैं, जो इन टॉवर्स के निर्माण एवं रखरखाव के लिए उत्तरदायी होते हैं। यद्यपि टॉवर्स के रखरखाव के लिए कई पदों पर व्यक्ति काम करते हैं, लेकिन टॉवर के लिए सबसे पहली जिम्मेदारी टेक्निशियन की होती है। टेक्निशियन किसी सब-कॉन्ट्रैक्टर का कर्मचारी होता है और मोबाईल टॉवर के स्थलों पर मौजूद रहता है। वो टॉवर्स का रखरखाव एवं सर्विसिंग देखता है।

एक आम टेक्निशियन लगभग 12 से 15 टॉवर देखता है और सुनिश्चित करता है कि टेलीकॉम नेटवक्र्स हमेशा ‘अप’ एवं संचालित अवस्था में रहें। टॉवर्स के रखरखाव में किसी भी बाधा से नेटवर्क प्रभावित होता है और क्षेत्र में सेवाओं की आपूर्दगी में बाधा पैदा हो जाती है। इसलिए साईट के टेक्निशियन की भूमिका इस संबंध में बहुत महत्वपूर्ण होती है।

यद्यपि सरकार डिजिटल इंडिया अभियान में सभी गांवों को कनेक्ट करके वहां नेटवर्क प्रदान करने का सपना देख रही है, वहीं पंजाब में इस प्लान के क्रियान्वयन में गंभीर बाधाएं भी हैं। फील्ड टेक्निशियन को बाहरी प्रभावों के चलते अपना काम शांति से पूरा कर पाना मुश्किल हो गया है। जहां ज्यादातर तकनीशियन अपना काम अच्छा और ईमानदारी से करना चाहते हैं, वहीं उनके कुछ स्वार्थी साथी उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं।

परंपरागत रूप से टेलीकॉम टॉवर सेक्टर की डीज़ल पर अत्यधिक निर्भरता है। जैसे-जैसे सेक्टर का विकास हुआ बिजली के वैकल्पिक साधन और बैटरियों का प्रयोग किया गया। दुर्भाग्यवश, इसकी शुरुआत से ही डीज़ल चोरी की घटनाएं हो रही हैं और आज भी इनके दैनिक कार्यों को प्रभावित कर रही हैं। कुछ टॉवर तकनीशियन भारी मात्रा में डीज़ल चोरी करते हैं। वो साईट पर मौजूद टेलीकॉम तथा पॉवर उपकरणों से छेड़छाड़ करते हैं और डीज़ल चुराते हैं, जिससे टॉवर्स को क्षति पहुंचती है और आग भी लगती है। चूंकि उनकी कोई यूनियन नहीं है, इसलिए वो अपने साथी तकनीशियनों को धमकाते हैं और अपने साथ मिलाने की कोशिश करते हैं। इसकी वजह से टेलीकॉम कंपनियों को ज्यादा डीज़ल की मांग करनी पड़ती है और नेटवर्क भी बहुत ज्यादा खराब होता है। इस तरह से उकसाए जाने पर पंजाब में ज्यादातर तकनीशियन या तो स्वेच्छा से या फिर दबाव में आकर टेलीकॉम नेटवक्र्स को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

डीजल की अत्यधिक चोरी करने वाले तकनीशियनों के प्रभाव में ज्यादातर तकनीशियन साईट पर डीज़ल की हिसाब रखने के लिए कोई भी लॉगबुक या रिकॉर्ड नहीं बनाने देते। जहां कंपनियों ने मोबाईल तकनीक का प्रयोग करके उत्पादकता में सुधार के कदम उठाने के प्रयास किए, वहीं तकनीशियनों ने नई टेक्नॉलॉजी अपनाने से इंकार कर दिया। वो टेलीकॉम कंपनियों पर दबाव डाल रहे हैं और उनसे सहयोग न करने तथा टेलीकॉम टॉवरों पर मौजूद न रहने की धमकी दे रहे हैं, जिन्हें तत्काल सर्विसिंग की जरूरत होती है और तो और साईट्स को खुद स्विच ऑफ करके टॉवर तक पहुंचने भी नहीं दे रहे।

इस तरह की अनुशासनहीनता से न केवल टेलीकॉम उद्योग, बल्कि पूरा समाज प्रभावित हुआ है। पंजाब में प्रयोग होने वाले डीज़ल का एक महत्त्वपूर्ण भाग चोरी हो जाता है। जबकि पिछले तीन सालों में बिजली की स्थिति में बहुत सुधार हुआ है, लेकिन डीज़ल के प्रयोग में कमी फिर भी नहीं हुई है। डीज़ल की चोरी से कमाया गया पैसा असामाजिक गतिविधियों में खर्च किया जाता है। गंभीर अपराधों जैसे संपत्ति को नुकसान, टेलीकॉम नेटवर्क न चलने देने, नारकोटिक्स, ड्रग तस्करी, जान से मारने की धमकी, बलात्कार और हत्या के इरादे से अपहरण के 15 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। कुछ तकनीशियनों को ड्रग और अल्कोहल के प्रभाव में अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा और उनके परिवार बहुत ज्यादा प्रभावित हुए। ऐसी खबरें भी हैं कि चोरी से कमाए गए पैसे का प्रयोग नियोजित अपराध के लिए किया जा रहा है। साईट से छेड़छाड़ के चलते उपकरणों के आगे पकडऩे, मानव जीवन को खतरा एवं संपत्ति के नुकसान के कई मामले सामने आए हैं। ऐसम मामले भी हुए हैं, जब पंजाब में एक साथ कई टॉवर्स स्विच ऑफ कर दिए गए। एक मामले में हजारों टॉवर एक साथ स्विच ऑफ हुए, जिससे टेलीकॉम सेवाओं में जबरदस्त रुकावट आई।

टॉवर एवं इन्नस्ट्रक्चर प्रोवाईडर्स एसोसिएशन  ताईपा), जो भारतीय टेलीकॉम प्लेयर्स जैसे इंडस टॉवर्स, भारती इन्नटेल, अमेरिकन टॉवर कंपनी  एटीसी), जीटीएल इन्नस्ट्रक्चर का प्रतिनिधित्व करता है, स्थानीय सरकारी अधिकरणों तथा पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर नेटवर्क संचालन का रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित काम कर रहा है :

मोबाईल टॉवर साईट्स को पर्याप्त पॉवर सप्लाई प्रदान करना।

डीजल की चोरी को कम करके भ्रष्ट फील्ड टेक्निशियनों के बीच फील्ड अनुशासन पैदा करना।

डीज़ल का तर्कसंगत प्रयोग सुनिश्चित करना, ताकि फील्ड में नियंत्रण व नियमों की स्थापना हो सके।

ग्रिड पॉवर के प्रयोग की निगरानी के लिए मॉनिटरिंग अलार्म तथा उपकरण की मेंटेनेंस का ऑनलाईन रिकॉर्ड रखने के लिए टेक्नॉलॉजी का प्रयोग।

तकनीशियनों को उकसाए जाने से रोकने के लिए समस्या समाधान की पर्याप्त व्यवस्था करना।

उपकरणों से छेड़छाड़ रोकने के लिए प्रक्रिया में एफिशियंसी स्थापित करना।

स्थानीय अधिकारियों को अनुशासनहीनता पैदा करने वाले तकनीशियनों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करने में मदद करना।

फील्ड टीम्स को साईट के रखरखाव में प्रशिक्षित करने तथा फील्ड में अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए टेक्निकल तथा एथिकल प्रशिक्षण प्रदान करना।

औद्योगिक संकाय द्वारा इस तरह के अभियान तथा सरकार एवं पुलिस अधिकारियों का सहयोग क्षेत्र में कम्युनिकेशन नेटवर्क की निरंतरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। टेलीकॉम उद्योग भारत सरकार के डिजिटल इंडिया तथा स्मार्ट सिटी अभियान में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है और इसीलिए यह आवश्यक है कि दुर्भावना के साथ सेवाएं बाधित करने के प्रयासों को खत्म किया जाए।

ताईपा के सदस्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तथा नगरी प्रशासन से इस समस्या के समाधान के लिए मदद मांग चुके हैं और उन्हें भरोसा दिलाया गया है कि टेलीकॉम नेटवर्क को बाधित करने वाली हर समस्या का समाधान किया जाएगा।