वि.स चुनाव 2019: अब कोई माई का लाल उमेश अग्रवाल को नहीं जिता सकता !

फाईल फोटो ,  खबर पार्ट-1  
 
कुमार मधुकर 
 
चंडीगढ़/गुड़गांव 11 मार्च 2018 । गुड़गांव शहर के विधायक उमेश अग्रवाल की कार्यशैली से यहां कि जनता बेहद खपा, निराश और हताश  है। शहर में इस बात को लेकर अभी से जबरदस्त चर्चा शुरू हो गई है कि विधानसभा चुनाव-2019 में अग्रवाल को किसी भी सूरत में भाजपा टिकट नहीं देगी। यदि किसी तरह से उन्हें टिकट मिल भी जाए तो, कोई माई का लाल उमेश अग्रवाल को गुड़गांव विधानसभा सभा सीट से इस बार कोई चुनाव जिता नहीं सकता। चर्चा में कथित तौर पर घमंड और अहंकार में चूर विधायक की कार्यशैली से जनता ही नहीं बल्कि राज्य में भाजपा नीति सरकार भी कई बार फजीहत हो चुकी है। उमेश अग्रवाल का गुड़गांव विधानसभा से किसी भी हालत में चुनाव-2019 नहीं जीत पाने और टिकट न मिलने के कई कारण भी गिनाए जा रहे हैं।  चर्चा तो यह भी है कि चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी गुड़गांव में डेरा डाल दे तो भी अग्रवाल को जनता वोट नहीं देगी। 
 
रेप के आरोप के बाद अग्रवाल की स्थिति  
सूत्रों के अनुसार गुड़गांव से बीजेपी विधायक उमेश अग्रवाल से शहर का मोह भांग हो गया है। ऐसा तब से और हुआ जब से विधायक उमेश के खिलाफ एक महिला की शिकायत पर रेप का मुकदमा दर्ज किया गया था। उस दौरान पीड़िता ने आरोप लगाया था कि उसकी जानने वाली एक महिला उसे बहाने से फरीदाबाद के एक होटल में ले गई थी. वहां नशीला ड्रिंक पिलाकर उससे रेप किया गया। यह सीधा सीधा आरोप विधायक उमेश अग्रवाल पर लगाया गया था। रेप की घटना 2015 की बताई गई थी। बाद में उस मामले में युवती बयान से पलट गई थी। इसके बावजूद राजनीतिक दलों ने प्रदेश भर में प्रदर्शन किया था। साथ में उमेश से इस्तीफा भी माँगा था। फ़िलहाल अग्रवाल आरोपमुक्त बताये जा रहे हैं। यह एक बड़ा कारण हो सकता है कि उमेश अग्रवाल गुड़गांव विधानसभा चुनाव-2019 जीत से न सिर्फ कोसों दूर रह सकते हैं, बल्कि टिकट मिलना भी आसान नहीं है। ऐसा मन जा रहा है। इस घटना से भाजपा की जबरदस्त किरकिरी हुई थी।     
 
खट्टर सरकार की भी किरकिरी 

सूत्रों का दावा है कि गुडगाँव विधायक उमेश अग्रवाल ने ग्वाल पहाड़ी जमीन का एक मसला उठाकर भाजपा की सरकार को ही कठघरे में खड़ा कर दिया था। उन्होंने खट्टर सरकार की कार्यप्रणाली को प्रभावहीन, बेलगाम अफसरशाही करार दिया था। हालांकि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के समर्थक विधायकों ने गुड़गांव विधायक उमेश अग्रवाल पर ही आरोप लगा दिया था कि अग्रवाल अपने निजी हितों को लेकर ऐसा कर रहे हैं। तब तो यहाँ तक कहा गया था कि अग्रवाल की नाराजगी की वजह सिग्नेचर टावर के नजदीक खुद के पेट्रोल पंप की एनओसी नहीं मिलना था। इस पर अग्रवाल ने उस दौरान अपनी सफाई दी थी कि उन्होंने सीएम को ऐसी कोई फाइल नहीं दी जिसमें उनका खुद का कोई हित छिपा हो। इससे भी भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व अग्रवाल को लेकर नाराज बताये जा रहे हैं। इस प्रकार की घटना से उमेश अग्रवाल के खिलाफ भाजपा की एक बड़ी लॉबी विरोध में हैं। सूत्रों के अनुसार यदि विरोध का सिलसिला इसी तरह बरकरार रहा तो विधानसभा चुनाव-2019 में अग्रवाल को टिकट मिलना भी भारी पड़ सकता है।   

 
इसलिए भी उमेश अग्रवाल का जीतना मुश्किल!  
सूत्र बताते हैं कि हरियाणा के गठन के बाद अब तक 11 विधानसभा चुनाव हुए। गुड़गांव विधानसभा चुनाव में अधिकतर कांग्रेस का ही दबदबा रहा, छह बार कांग्रेस के ही प्रत्याशी जीते। धर्मबीर गाबा के बाद कोई एक ऐसा नेता नहीं हुआ, जो लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीते हैं। यदि पिछले विधानसभा चुनाव-1991 से ट्रेंड पर नज़र डालें तो धर्मबीर गाबा ने इनेलो प्रत्यासी गोपीचंद गहलोत को हराया और विधायक बन गए। विधानसभा चुनाव-1996 में गाबा ने ही एक बार फिर बाजी मारते हुए भाजपा प्रत्याशी सीताराम सिंगला को पराजित कर विधायक बनने में कामयाबी हासिल की थी। इसके बाद से लेकर अबतक गुड़गांव विधानसभा चुनाव में कोई प्रत्याशी ऐसा नहीं हुआ जो लगातार दो बार विधानसभा चुनाव जीत पाए हों। 
 
दोबारा बन नहीं पाए विधायक 
सूत्रों के अनुसार यदि गंभीरता से नजर डालें तो विधानसभा चुनाव-2000 में निर्दलीय प्रत्याशी गोपीचंद गहलोत ने कांग्रेस प्रत्याशी धर्मबीर गाबा को हरा दिया था। वहीँ विधानसभा चुनाव-2005 में गाबा ने गहलोत को पराजित कर दिया था। वहीँ विधानसभा चुनाव-2009 को देखें तो निर्दलीय उम्मीदवार सुखबीर कटारिया ने कांग्रेस प्रत्याशी धर्मबीर गाबा को मात दी थी। इसके बाद जब विधानसभा चुनाव-2014 हुआ तो उमेश अग्रवाल ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी इनेलो प्रत्याशी गोपीचंद गहलोत को पटकनी दी थी। इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार अग्रवाल को कुल 10,6106 वोट मिले। वह 84095 वोटों के रेकॉर्ड मार्जिन से जीते। इस प्रकार से वर्ष 2000 के बाद से यह ट्रेंड बन गया कि दोबारा कोई भी प्रत्याशी विधानसभा चुनाव नहीं जीत सकता। ऐसे में सूत्रों का दावा है कि विधानसभा चुनाव-2019 में किसी भी सूरत में उमेश अग्रवाल चुनाव नहीं जीत सकते। यह भी दवा किया जा रहा है कि 2019 चुनाव में अग्रवाल को भाजपा बिलकुल भी टिकट नहीं देगी।           
       
अग्रवाल नहीं तो कौन, खट्टर!  
सूत्रों की मानें तो विधानसभा चुनाव-2019 में उमेश अग्रवाल की स्थिति ठीक नहीं रहेगी। इसके कई कारण बताये जा चुके हैं। गुड़गांव विधानसभा क्षेत्र में पंजाबी वोटरों की संख्या ज्यादा है। ऐसे में भाजपा अभी से एक पंजाबी उम्मीदवार की खोज में है। बताया जाता है कि ऐसी परिस्थिति में बीजेपी के पास सटीक उम्मीदवार वर्तमान मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर हैं। इसलिए इसकी पूरी संभावना बन रही है कि विस चुनाव-2019 में उमेश अग्रवाल की जगह मनोहरलाल खट्टर गुड़गांव से उम्मीदवार बन सकते हैं। ऐसी परिस्थिति में उमेश अग्रवाल के लिए गुड़गांव से 2019 चुनाव में भाजपा टिकट मिलना आसान नहीं होगा। वैसे भी विधायक ने गुरुग्राम के वर्तमान सांसद एवं केन्द्रीय मंत्री रॉव इंद्रजीत का दामन पकड़ लिया है। चर्चा में राव इंद्रजीत मुख्यमंत्री विरोधी माने जाते हैं।