मानेसर भूमि अधिग्रहण घोटाला: सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया

चंडीगढ़, 12 मार्च:2018,  नेता विपक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने सर्वोच्च न्यायालय के उस निर्णय का स्वागत किया है जिसके द्वारा 24 अप्रैल, 2007 के हुड्डा सरकार के उस आदेश को रद्द किया गया है, जिसके द्वारा मानेसर भूमि अधिग्रहण घोटाला किया गया था। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों बाद सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय ने उस कहावत को चरितार्थ कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ‘न्याय का रथ भले ही धीरे चलता हो लेकिन चलता जरूर है’। 
हुड्डा सरकार ने 24 अप्रैल, 2007 को मानेसर की उस 600 एकड़ भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया था जिसमें 600 एकड़ भूमि का अधिग्रहण मानेसर के औद्योगिक कर्मचारियों के निवास के लिए किया जा रहा था। अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में सरकार ने अपनी शक्ति का उपयोग दुर्भावना से किया है और उनके अनुसार यह सत्ता के साथ धोखाधड़ी का मामला था जिस कारण इसे रद्द किया जाता है।
नेता विपक्ष ने कहा कि इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) एक लम्बे समय से उस भूमि घोटाला की जांच की मांग कर रहा था और इस संदर्भ में उसने हर उस दरवाजे को खटखटाया था जहां से किसानों को न्याय दिलवाने की आशा हो सकती थी। परंतु उस पर भी जब सत्ताधारियों के कान पर जूं न रेंगी तो अंत में इनेलो ने हुड्डा सरकार के विरुद्ध एक व्यापक आरोप-पत्र बनाया था जिसमें मानेसर भूमि अधिग्रहण घोटाला सहित अनेक और घोटालों में भी जांच की मांग की गई थी। उस आरोप पत्र को हरियाणा के राज्यपाल महोदय को दिया गया था परंतु यह खेद की बात है कि भाजपा सरकार उस आरोप पत्र पर तीन वर्ष से भी अधिक समय पर भी निष्क्रिय बनी रही। अभी कुछ समय पूर्व ही अंतत: मानेसर घोटाले की जांच का मामला सीबीआई को सौंपा गया था जिसने जांच के पश्चात निर्धारित सीबीआई न्यायालय में अब एक आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख करते हुए अभय सिंह चौटाला ने कहा कि  सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय किसानों को न्याय देने के मामले में एक मील पत्थर है। इसके अतिरिक्त एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आज दिए गए इस निर्णय में माननीय न्यायाधीश ने एक बार फिर ‘उड़ार गगन’ मामले का उल्लेख करते हुए यह दोहराया है कि अब बिल्डरों एवं अन्य निजी इकाइयां भूमि मालिकों को दी गई राशि को वसूल करने के हकदार नहीं होंगे। 
नेता विपक्ष ने कहा कि इस निर्णय द्वारा जनसाधारण की आस्था और निष्ठा देश की न्यायिक प्रणाली में बढ़ी है क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्य एवं केंद्र सरकार इस पूरे मामले की तह में जाएंगे और एक-एक पैसा वसूल कर सरकारी खजाने में जमा करवाएंगे। यह भी कहा गया कि इस घोटाले में बिचौलियों द्वारा प्राप्त की गई रकम की भी  पूरी जानकारी सरकारें प्राप्त करेंगी और आवश्यक कार्रवाई करेंगी।
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले ने अभी तक इस संबंध में इनेलो द्वारा किए गए संघर्ष के औचित्य पर एक प्रकार से मोहर लगाई है और इसलिए उन्होंने मनोहर लाल खट्टर सरकार से आग्रह किया कि वह आरोप पत्र में लिखे गए अन्य आरोपों की भी जांच करवाकर सच्चाई को जनता के समक्ष रखें और जो आरोप हैं उनके विरुद्ध मुकद्दमे दायर किए जाएं।