हाऊसिंग स्कीम पर किरण खेर ने किया बार-बार धोखा: डॉ धर्मेंद्र

खेर की जमानत जब्त कराकर वपिस भेजेंगे
 
राज सिंह 
 
चंडीगढ़ 27 अक्टूबर 2018, यूटी इम्पलाइज सीएचबी हाउसिंग वेल्फेयर सोसायटी चण्डीगढ के महासचिव डॉ धर्मेन्द्र ने कहा कि हमें अपनी न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। उन्होंने चण्डीगढ प्रशासन द्वारा माननीय हाईकोर्ट के दबाव में यूटी इम्पलाइज हाउसिंग स्कीम के सैक्टर 53 में बनने वाले फ्लैटों के लिए दो दिन में ही नक्शे पास करने के आदेश पर खुशी जाहिर की है, परन्तु साथ ही कहा कि यूटी इम्पलाइज हाउसिंग स्कीम को लटके हुए 10 साल से भी ज्यादा हो गये हैं। लेकिन सरकार और उसके अधिकारी कोई फैसला करने को तैयार नहीं है। जो फैसला करते भी हैं तो वो केवल आंखों में धूल झोंकने के लिए है। डॉ धर्मेन्द्र ने कहा यदि भाजपा से किरण खेर को उम्मीदवार बनाया जाता है तो यूटी के सभी कर्मचारी संगठन खेर की जमानत जब्त कराकर वपिस भेजेंगे, क्योंकि खेर हजारों कर्मचारियों को साढ़े चार साल से मूर्ख बना रही है। । साथ ही कर्मचारी संगठनों की ओर खड़े उम्मीदवार को सांसद बनाएंगे।  
 
समाचार पत्रों में छपी खबरों का हवाला देते हुए हुए डॉ० धर्मेन्द्र ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के दबाव में केवल यह दिखाने के लिए कि कुछ काम करके दिखाएं ताकि हाईकोर्ट समझे कि वाकई प्रशासन ने कुछ काम किया है । डॉ० धर्मेन्द्र ने स्पष्ट किया यह केवल आंखों में धूल झोंकने के सिवाय कुछ नहीं है।  हम अधिकारियों से पूछना चाहते हैं कि जब सैक्टर सैक्टर 53 में यूटी इम्पलाइज हाउसिंग स्कीम के लिए पहले से ही 11.79 एकड़ जमीन अलाट है जिस पर स्कीम के अनुसार कैटेगरी एक के लिए 252 फ्लैट बनाये जाने हैं। उसका *ले-आउट प्लान* पहले ही पी ए सी(अप्पर) *प्लान अप्रूवल कमेटी (अप्पर)* जिस कमेटी के चेयरमैन चीफ एडमिनिस्ट्रेटर (फाइनेंस सेक्रेट्री) होते हैं से अप्रूवड हैं तो अब अधिकारियों ने ए बी और डी कैटेगरी के मकान उसी 11.795 एकड़ जमीन पर बनाने के लिए नया नक्शा क्यों बनाया ? यदि यह समझा जाए  कि इस जमीन ज्यादा लोगों के लिए घर बनाए जा सकते हैं और यही सोचकर नये ले आउट प्लान बनाए गये तो फिर पिछले पांच छह महीनों से नक्शे(ले आउट प्लान) क्यों लटकाए। 
 
अधिकारियों की इस स्कीम पर नियत ठीक नहीं है इसीलिए ले-आउट प्लान इस डिपार्टमेंट से उस डिपार्टमेंट भेजते रहे और आखिर में अधिकारियों की मिलीभगत से ये ले आउट प्लान चीफ आर्किटेक्ट के पास ही पड़े रहे। माननीय उच्च न्यायालय का डंडा चला तो दो दिन में मीटिंग करके नक्शे पास करने का ड्रामा रच दिया । ये सब बातें हम माननीय उच्च न्यायालय को एफिडेविट देकर बताएंगे कि किस तरह अधिकारी कर्मचारियों और आम पब्लिक को धोखे में रख रहे हैं । 
 
डॉ० धर्मेन्द्र ने कर्मचारियों के साथ साथ आम पब्लिक को भी आगाह किया कि चण्डीगढ हाउसिंग बोर्ड के झांसे में ना आएं। चण्डीगढ हाउसिंग बोर्ड का काम लोगों से केवल पैसा इकट्ठा करने का ही रह गया है । कर्मचारियों से चण्डीगढ हाउसिंग बोर्ड ने दस साल पहले 58 करोड़ रुपये लिए थे लेकिन स्कीम को इतना उलझाया ताकि मामला ज्यादा देर तक लटका रहे और बोर्ड को कर्मचारियों के पैसे का ब्याज मिलता रहे । डॉ धर्मेन्द्र ने कर्मचारियों द्वारा पिछले दस साल से बोर्ड के पास जमा कराए 58 करोड़ के ब्याज की मांग की । उन्होंने कहा कि हमारा पिछले दस साल का 58 करोड़ का ब्याज भी दिया जाए और यूटी इम्पलाइज हाउसिंग स्कीम के तहत जल्द से जल्द कर्मचारियों को फ्लैट बनाकर दिये जाएं। 
 
डॉ० धर्मेन्द्र ने आगे कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो हम माननीय हाईकोर्ट से इस सारे मामले की सीबीआई जांच की मांग भी करेंगे और इस स्कीम को लटकाने में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज करने के लिए याचिका दायर करेंगे।