CHD:एडवाइजर परिमल राय ने वो कर दिखाया, जो किसी ने नहीं

एडवाइजर परिमल राय ने ऐसे किया करोड़ों घोटाले का उजागर
 
कुमारएम
 
चंडीगढ़ 4 दिसंबर 2018। यूटी प्रशासक के एडवाइजर परिमल राय ने शहर के लिए वो कर दिखाया जो, दो दशक में किसी भी बड़े अधिकारी नहीं किया था। इस बीच कई एडवाइजर आये और कुर्सी तोड़कर चले गए, पर परिमल राय पहला एडवाइजर या बड़े IAS अधिकारी हैं, जिन्होंने 10-15 साल से अधिक समय से चल रहे करोड़ों के घोटाले को न सिर्फ उजागर किया, बल्कि बहुत हद तक रिकवरी करवाने में भी कामयाबी हासिल की। साथ ही राय की सख्ती से बडी मछलियों को दबोचने में भी कामयाबी पाई। हालांकि एक्साइज एन्ड टेक्सेशन डिपार्टमेंट के कई बड़े मगरमछों को दबोचने का काम अभी बांकी है। इस बीच शहर के आम जनता और कई समाजसेवियों ने उनके द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना की है। क्योंकि एक्साइज एंड टैक्सेशन में यह घोटाला पिछले कई सालों से चल रहा था, जिसे वर्तमान एडवाइजर राय ने उजागर किया है। 
 
यहाँ बताना कि करोड़ों के टैक्स घोटाले में इंडो स्विफ्ट कंपनी का मालिक नवरत्न मुंजाल गिरफ्तार हो चुका है। करोड़ों रुपए टैक्स घोटाले के मामलें में क्राइम ब्रांच की टीम ने सोमवार 3 दिसंबर 2015 को बड़ी कार्रवाई करते हुए इंडो स्विफ्ट कंपनी के मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी कंपनी के मालिक नवरत्न मुंजाल के खिलाफ मामलें की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने जालसाजी की धाराओं के तहत केस दर्ज कर देर शाम गिरफ्तारी की है। 
 
इसके साथ ही क्राईम ब्रांच की टीम अब तक चार कंपनी मालिकों को नोटिस जारी कर रिकार्ड लाने के लिए कहा है। सूत्रों की माने तो जिन चार कंपनियों को नोटिस जारी हुए है। उनके मालिकों से भी पूछताछ की जाएगी। वहीं घोटाले में शामिल कई कंपनी मालिक इस घोटाले में नाम आने के बाद से सदमें में चल रहे है। मामलें में जल्द ही और भी गिरफ्तारियों के संकेत मिल रहे है। सोमवार को इस घोटाले को लेकर एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर जितेंद्र यादव के साथ एसपी विजिलेंस एवं क्राईम रवि कुमार के मिटिंग हुई। सूत्र बताते है कि इसी बैठक के बाद फैक्ट्स क्लियर होने के बाद क्राईम ब्रांच की ओर से देर शाम नवरत्न मुंजाल की गिरफ्तारी कर ली गई।
 
कंपनी के कर्मचारी विपिन मिश्रा की हुई थी गिरफ्तारी..
एडवाइजर के सामनें मामला प्रकाश में आने के बाद इस केस की जांच विजिलेंस को सौंपी गई थी। जांच में विजिलेंस ने सबसे पहले कंपनी के एक कर्मचारी विपिन मिश्रा को गिरफ्तार किया था। सूत्रों की माने तो विजिलेंस जांच में ही यह पूरी तरह से साफ हो गया था कि इंडो स्विफ्ट कंपनी के मालिक नवरत्न मुंजाल का करोड़ों रुपए के इस टैक्स घोटाले में सीधे तौर पर भूमिका है। इसके बाद से ही मुंजाल की गिरफ्तारी तय थी। लेकिन अपनी गिरफ्तारी पर मंडरा रहे संकट के बादल को देखते हुए नवरत्न मुंजाल ने कोट का दरवाजा खटखटाते हुए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। लेकिन मामलें में सामने आए कई नए तथ्यों के अधार पर क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
 
इन कंपनियों को क्राईम ब्रांच ने जारी किए नोटिस..
करोड़ों रुपए के टैक्स घोटाले के इस पूरे मामलें की जांच पहले विजिलेंस को सौंपी गई थी। लेकिन बाद में यह मामला क्राइम ब्रांच को सौंपा गया। मामलें की तेजी जांच करने में जूटी क्राइम ब्रांच की टीम ने चार कंपनियों को नोटिस जारी किया है। उनमें विशाल इंटरप्राइजेज,विशाल डिस्ट्रीब्यूटर,इंपेकेबल लैबोरेट्रीज और अग्रवाल इलेक्ट्रिक के नाम शामिल है।
 
एडवाइजर को हुआ था शक, जांच में निकला घोटाला..
17 जुलाई 2018 को वैट ट्रिब्यूनल की कोर्ट यूटी प्रशासन में लगी थी। इस ट्रिब्यूनल कोर्ट की अध्यक्षता एडवाइजर परिमल राय कर रहे थे। उनकी कोर्ट में इंडो स्विफ्ट कंपनी का केस भी लगा हुआ था। उस केस में एक्साइज डिपार्टमेंट ने कंपनी पर 5 करोड़ 90 लाख 54 हजार 342 रुपये बकाया वैट निकाला। एडवाइजर ने जब केस का स्टेटस पूछा तो कंपनी के वकील ने कहा कि उनका मामला तो 31 मार्च 2015 को खत्म भी हो चुका है। एक्साइज डिपार्टमेंट ने उनसे 5 हजार रुपये का टैक्स लेकर चालान कर दिया था। इस पर एडवाइजर को शक हुआ कि कैसे 5.90 करोड़ रुपये का टैक्स मात्र 5 हजार रुपये के चालान में पूरा हो गया। इसके बाद इनक्वायरी की तो ये घोटाला सामने आया। जिसके बाद विजिलेंस ने केस दर्ज किया था। इस केस की जांच अब यूटी एक्साइज एंड टैक्सेशन डिपार्टमेंट और यूटी पुलिस क्राइम ब्रांच मिलकर कर रहे हैं।
 
एक्साइज एंड टैक्सेशन ने इंडो स्विफ्ट कंपनी पर 66 करोड़ रुपये टैक्स व पेनल्टी लगाई है। विभाग ने इंडो स्विफ्ट कंपनी को आदेश जारी कर 20 करोड़ रुपये बकाया टैक्स जमा कराने और करीब 46 करोड़ रुपये पेनल्टी भरने के आदेश जारी किए थे। वर्ष 2011-12 के दौरान इंडो स्विफ्ट कंपनी ने करोड़ों रुपये का वैट घोटाला किया का आरोप है। जिसकी जांच पूरी हो चुकी है। 
 
वैट घोटाले में विजिलेंस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे ही कई नए नाम इसके साथ जुड़ रहे हैं। सबसे पहले इस घोटाले में पकड़ी गई इंडो स्विफ्ट कंपनी के डायरेक्टर जी मुंजाल गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट पहुंच गए थे। हालाँकि मुंजाल को इसका कोई लाभ नहीं मिला और गिरफ्तार कर लिए गए।इसके पहले मुंजाल ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में एप्लीकेशन लगाई थी, जिस पर 20 सितंबर के लिए विजिलेंस को नोटिस हुआ था।