लो.स चुनाव:2019; खेर नहीं तो, टंडन भी नहीं, जैन हो सकते हैं उम्मीदवार

या फिर भाजपा को वर्ष-2014 की तरह ही मिलेगा पैराशूट कैंडिडेट. खबर में लगी सभी फाइल फोटो 

राज सिंह 

चंडीगढ़ 8 दिसंबर 2018। शहर की भाजपा में एक बार फिर से राजनीतिक तौर पर गर्दनकाट घमासान शुरू हो गया है। गर्दनकाट इस राजनीति में एक धड़ा लोकसभा चुनाव-2019 की टिकट के लिए प्रबल दावेदार वर्तमान सांसद किरण खेर को बता रहा है। वहीं दूसरा धड़ा संजय टंडन की टिकट पक्की मानकर चल रहे हैं। अब तीसरे धड़े ने खेर और टंडन की दावेदारी पर पानी फेरते हुए उनकी नींद ही उड़ा दी है। बताया जाता है कि आज के हालात के अनुसार राजनीति के दिग्गज खिलाड़ी सत्यपाल जैन ही सबसे उपयुक्त और सटीक उम्मीदवार हो सकते हैं। यदि पार्टी में तीनों धड़ों के बीच घमासान इसी तरह चलती रही, तो लोकसभा चुनाव-2014 की तरह ही उक्त तीनों धड़े देखते के देखते रह जाएंगे और पैराशूट कंडिडेट चंडीगढ़ में उतार दिए जाएंगे।

किरण खेर होगी उम्मीदवार! 
राजनीतिक जानकारों और सूत्रों की मानें तो सीटिंग एमपी के नाते किरण खेर ही वर्ष-2019 के लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार होगी। किरण खेर के पक्ष में यह बात भी जाती है कि उनके पति अनुपम खेर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास बताये जाते हैं। अनुपम खेर ने देश-विदेश में मोदी का माहौल बनाने का भी काम भी किया है। इन सबके बावजूद किरण की साढ़े चार साल की कार्यशैली से न सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में बल्कि शहर की जनता में खेर के प्रति जबरदस्त गुस्सा और नाराजगी है। इसकी रिपोर्ट पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के पास भी है। ऐसे में खेर का क्या होगा। समय ही बताएगा। यहाँ सोचने वाली बात है कि इस बार देश में मोदी की लहर नहीं है। खेर के साथ बड़े भाई हरमोहन धवन पार्टी छोड़कर चले गए हैं। कथित अहंकार और गुरुर के कारण खेर ने धवन को मनाने कोशिश भी नहीं की। यहाँ तक की संगठन मंत्री दिनेश कुमार और चंडीगढ़ प्रभारी प्रभात झा ने भी धवन को मनाने की जरूरत नहीं समझी।  
 
 दूर-दूर तक राह नहीं आसान 
अब जब आगामी लोकसभा चुनाव में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन को टिकट मिलने की बात है, तो राजनीतिक पंडितों के अनुसार दूर-दूर तक इसका कोई आसार नहीं दिख रहा है। इसका मुख्य कारण वर्ष-2018 में मेयर उम्मीदवारी को लेकर केंद्रीय नेतृत्व की किरकिरी करना। मेयर बनने के बाद से देवेश मोदगिल के लिए नगर निगम हाउस में टंडन धड़े की ओर से लगातार पूरा साल तक मुसीबत पैदा करना,  टंडन के खिलाफ जाता है। वहीं टंडन की कार्यशैली से कद्दावर नेता हरमोहन धवन का पार्टी छोड़ जाना भी टंडन की दावेदारी को कमजोर कर रहा है। क्योंकि पार्टी टूट के लिए टंडन को ही मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस प्रकार से टंडन के सिर इस बात का भी ठीकरा भी फोड़ा जा रहा है कि कद्दावर नेता सत्यपाल जैन की राजनीति खत्म करने की कोशिश से पार्टी की खूब किरकिरी हुई थी। फिलहाल टंडन और खेर धड़े में खुलकर राजनीतिक तलवारवाजी हो रही है। हालांकि धवन का पार्टी छोड़ना खेर की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा कर रहा है कि जिस भाई ने छोटी बहन के लिए तन, मन और धन लगा कर काम किया, उस भाई को बहन खेर लगातार साढ़े चार तक इग्नोर करती रही। पार्टी में धवन बेईज्जत, अपमानित होते रहे और छोटी बहना देखती की देखती रह गई।   
 
गफलत में टंडन समर्थक!
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि टंडन समर्थक पिछले लोस चुनाव की तरह गलतफहमी पाल रहे हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में टंडन को ही टिकट मिलेगी। जानकारों के अनुसार समर्थकों में यह गलतफहमी इसलिए बढ़ गई है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद टंडन के घर आये थे। राजनीतिक पंडित बताते हैं कि रामनाथ कोविंद छतीसगढ़ के गवर्नर स्वर्गीय बलराम दास टंडन के परिवार से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त करने आये थे, न कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन के घर आए। हालांकि टंडन राष्ट्रपति के घर आने को राजनीतिक तौर पर महिमामंडित कर रहे हैं। ताकि लोग यह जोड़ सके कि राष्ट्रपति का उनके घर आना लोकसभा से टिकट का ही संकेत है।
 
तीसरे धड़े ने मुसीबत की कड़ी 
तीसरे धड़े ने किरण खेर के साथ संजय टंडन के लिए मुसीबतें खड़ी कर दी है। वर्ष-2019 की टिकट को लेकर टंडन-खेर की लड़ाई में पार्टी के कद्दावर सत्यपाल जैन बाजी मार सकते हैं । एक कार्यक्रम में जैन ने इशारा कर खेर-टंडन की जमीन ही हिला दी है कि यदि मौका मिला तो लोस चुनाव लड़ेंगे। राजनीतिक पंडितों की नजर में जैन पीएम मोदी और और अमित शाह के काफी नजदीकी हैं । इसका मुख्य कारण यह है कि जैन मोदी, अमित शाह और पार्टी के लिए कई केस पुख्ता तरीके से लड़ चुके हैं। पार्टी में जैन की किसी भी विषय पर कानूनी सलाह को गंभीरता से लिया जाता हैं। 
 
इस बार भी जैन नहीं तो कोई नहीं, पैराशूट 
राजनीतिक जानकर यह भी मान रहे हैं कि वर्ष-2014 लोकसभा चुनाव में टिकट के लिए जैन, टंडन और धवन की लड़ाई में पैराशूट कंडिडेट के तौर पर किरण खेर को चुनाव लड़ाया गया था। इस बार भी लोकसभा चुनाव-2019 की हालत वैसे ही होने वाली है। खेर, टंडन और जैन की भिड़ंत में कोई बाहर का कंडिडेट बाजी मार सकता है। कपिल देव के अलावा कोई और भी हो सकते हैं। ध्यान रहे कि इस बार हरमोहन धवन भाजपा छोड़कर आम आदमी पार्टी में जा चुके हैं।